गेहूं और मक्के को लेकर रूस ने किया बड़ा ऐलान…

गेहूं पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में 3.20 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की जाएगी. इसके बाद गेहूं पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 41.30 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो जाएगी.

इस बार गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई है.

रूस जल्द ही अपने देश से निर्यात होने वाले गेहूं और मक्के पर निर्यात शुल्क बढ़ाने वाला है. रूस के कृषि मंत्रालय ने इसकी घोषणा की है. हालांकि बारली पर 30 जून से छह जून तक निर्यात दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसे लेकर शुक्रवार को विभाग ने नोटिस जारी किया है. रूस की राजधानी मॉस्को में स्थित मॉस्को एक्सचेंज के सात दिवसीय औसत इंडेक्स प्राइस 259.10 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के अनुसार गेहूं पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में 3.20 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की जाएगी. इसके बाद गेहूं का एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 41.30 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो जाएगी. जबकि मॉस्को एक्सचेंज के सात दिनों के इंडेक्स के आधार पर मक्के एक्सपोर्ट पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी 0.30 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50.30 डॉलर प्रति मीट्रिक टन करने पर विचार किया जा रहा है, जिसपर एक्सपोर्ट ड्यूटी का एक सप्ताह का औसत 257.20 डॉलर था. इस तरह से मक्के पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ जाएगी.

रूस ने बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी

इधर बारली के निर्यात शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की गयी है. वर्तमान में बारली पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 39.60 डॉलर प्रति मीट्रिक टन है. मॉस्को एक्सचेंज के मुताबिक इसका सात दिवसीय औसत इंडेक्स प्राइस 241.70 डॉलर प्रति मीट्रिक टन है

रूस में टैक्स को जोड़ने के लिए एक अलग फॉर्मूला है. जिसके तहत निर्यातकों को उद्योगों के विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा तय किये टैक्स की दरें और मॉस्को एक्सचेंज द्वारा निर्धारित किये गये फ्लोर प्राइस और फ्लोटिंग इंडेक्स प्राइस के बीच के अंतर की राशि का 70 फीसदी भुगतान करना होता है.

प्रत्येक शुक्रवार को टैक्स की नयी दरें अपडेट की जाती हैं. फिर नयी दरों को पब्लिश किया जाता है. नयी दरें पब्लिश होने के तीन दिन बाद इसे लागू किया जाता है. विपणन वर्ष 2021-22 के लिए यह योजना एक जुलाई से शुरू होने वाली है. गौरतलब है कि रूस दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं एक्सपोर्ट करने वाला देश है.

भारत से गेहूं का एक्सपोर्ट

आंकड़ों के मुताबिक साल 2013-14 में भारत बड़े पैमाने पर गेहूं और मक्के का निर्यात करता था. इस साल भी भारत में गेंहू का अच्छा उत्पादन हुआ है. जबकि पुरे साल भर किसान कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन पर डटे हुए हैं.
गेहूं उत्पादन के मामले में भारत विश्व में दूसरा स्थान रखता है. पहले स्थान पर चीन है. गेहूं का उत्पादन मुख्य तौर पर उत्तर भारत में अधिक मात्रा में होता है. गेंहू के उत्पादन पर जोर देने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने कई अनुसंधान किये हैं और गेंहू की कई उन्नत किस्में बनायी है, जिससे पैदावार बढ़ा है.

वैश्विक बाजार में भी भारत के गेहूं की अच्छी मांग है और यह लगातार बढ़ती ही जा रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 के दौरान भारत ने 2,17,354.22 मीट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया था. इसके देश को 439.16 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी. 2019-20 में भारत ने नेपाल, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, सोमालिया और कोरिया में गेहूं का निर्यात किया था.

गेहूं को भारत में रबी फसल भी कहा जाता है. दिंसबर –जनवरी महीने में इसे लगाया जाता है. ठंडा प्रदेशो में इसकी खेती की जाती है.

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Author: CG FIRST NEWS

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