पारसी नववर्ष पर राष्ट्रपति कोविंद और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने दी शुभकामनाएं, कहा- देश के विकास में समुदाय का है खास योगदान

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद. (फाइल फोटो)

आज देश में पारसी नववर्ष मनाया जा रहा है. इस दिन पारसी समुदाय उपासना स्थलों पर अग्नि को चंदन की लकड़ी समर्पित करते हैं और एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं देते हैं. दरअसल पारसी नव वर्ष (new year) पारसी समुदाय (community) के लिए बेहद आस्था का विषय है. इस दिन को पारसी समुदाय के लोग उत्साह के साथ मनाते हैं. वहीं इस मौके पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी सोमवार को पारसी समुदाय के लोगों को नव वर्ष नवरोज के अवसर पर बधाई दी है.

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा “नवरोज़ मुबारक! पारसी समुदाय के लोगों ने देश विकास के कई पहलुओं में अपार योगदान दिया है. पारसी नव वर्ष सभी के जीवन में एकता, समृद्धि और खुशियां लाए और हमारे नागरिकों के बीच सद्भाव और बंधुत्व की भावना को और मजबूत करे.”

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी किया ट्वीट

वहीं इस मोके पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी ट्वीट कर बधाई दी. नायडू ने ट्विटर पर लिखा, “महान पारंपरिक उत्सव के साथ मनाया जाने वाला नवरोज सभी के लिए बंधुत्व, करुणा और सम्मान की भावना का प्रतीक है. आने वाला साल हमारे जीवन में समृद्धि और खुशियां लाए. ”

पीएम नरेंद्र मोदी ने लिखा, ”पारसी नव वर्ष की बधाई. सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य से भरे साल के लिए प्रार्थना. भारत विभिन्न क्षेत्रों में पारसी समुदाय के उत्कृष्ट योगदान का सम्मान करता है. नवरोज मुबारक!”

फ़ारसी में, ‘नव’ का अर्थ है नया, और ‘रोज़’ का अर्थ है दिन, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘नया दिन’. ईरानी और पारसी समुदाय पिछले 3,000 वर्षों से पारंपरिक नव वर्ष मना रहे हैं. यह दिन वसंत की शुरुआत के लिए समर्पित है और लोगों और विभिन्न समुदायों के बीच शांति, एकजुटता और दोस्ती को बढ़ावा देता है. यह दिन वसंत की शुरुआत और प्रकृति के नवीनीकरण का भी प्रतीक है.

प्रमुख तौर पर महाराष्ट्र और गुजरात में मनाया जाता है

भारत में यह नववर्ष प्रमुख तौर पर महाराष्ट्र और गुजरात में मनाया जाता है क्योंकि यहां एक बड़ी पारसी आबादी रहती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार नवरोज अगस्त के महीने में आता है. इस साल यह 16 अगस्त को मनाया जा रहा है. फारसी राजा जमशेद के बाद नवरोज को जमशेद-ए-नवरोज के नाम से भी जाना जाता है. राजा जमशेद को ही फारसी कैलेंडर, या शहंशाही कैलेंडर बनाने का श्रेय दिया जाता है.

पारसी लोग इस शुभ दिन पर फल, चंदन, दूध और फूल चढ़ाते हैं

इस दिन पारसी समुदाय अपने पारंपरिक पोशाक में तैयार होते हैं, अपने घरों को सजाते हैं और प्रॉन आंगन, मोरी डार, पात्र नी माची, हलीम, अकुरी, बेरी पुलाव, पात्र नी माछी और अन्य सहित स्वादिष्ट भोजन तैयार करते हैं. पारसी भी अग्नि मंदिर (अगियरी) जाते हैं और इस शुभ दिन पर फल, चंदन, दूध और फूल चढ़ाते हैं.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद. (फाइल फोटो
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Author: CG FIRST NEWS

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